MP NEWS : ऑक्सीजन सपोर्ट पर तड़पता रहा मरीज, परिजन रात 1 बजे तक करते रहे गुहार
MP NEWS : बड़वानी जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने आई है। एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को सुबह 11 बजे इंदौर के एमवाय अस्पताल के लिए रेफर किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि रात 1 बजे तक भी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी।
करीब 14 घंटे तक मरीज जिला अस्पताल में ही ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती रहा। परिजन लगातार अधिकारियों से संपर्क करते रहे, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता रहा कि “एंबुलेंस रास्ते में है।” यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि उस दर्द और बेबसी को भी सामने लाती है, जिससे मरीज का परिवार गुजरा।
MP NEWS : बड़वानी- रेफर के बाद भी ‘राम भरोसे’ मरीज, 14 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार
MP NEWS : आईसीयू के बाहर इंतजार और बेबसी
रात का समय… अस्पताल का सन्नाटा… और आईसीयू के बाहर बैठी दो महिलाएं। मरीज की पत्नी और बड़ी बहन सुबह से एंबुलेंस का इंतजार कर रही थीं। हर गुजरते घंटे के साथ उनकी चिंता और बेचैनी बढ़ती जा रही थी। वे बार-बार अधिकारियों से संपर्क करती रहीं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।
मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही थी और डॉक्टरों ने समय पर बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। परिजन सवाल पूछ रहे थे … अगर रेफर कर दिया गया है, तो फिर एंबुलेंस क्यों नहीं आई?

विधायक पहुंचे अस्पताल, उठाए सवाल
मामले की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक राजन मंडलोई रात करीब 8 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बात की और स्थिति की जानकारी ली। विधायक के अनुसार, रात 10 बजे से सीएमएचओ और संबंधित अधिकारियों को लगातार फोन लगाए जा रहे थे। हर बार यही जवाब मिला कि एंबुलेंस रास्ते में है।
विधायक ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कमजोर दिखाई दे रही हैं। उन्होंने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सिविल सर्जन का सहयोग, फोन पर रहे सक्रिय
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना का सहयोग परिजनों ने सराहा है। परिजनों के अनुसार, डॉ. खन्ना रात 1 बजे तक लगातार फोन पर संपर्क में बने रहे। वे किसी आवश्यक कार्य के चलते अस्पताल नहीं पहुंच सके, लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों से समन्वय करते रहे।
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परिवार का कहना है कि उन्होंने स्थिति को गंभीरता से लिया और हरसंभव प्रयास किया। मरीज की बड़ी बहन गायत्री, जो धामनोद की निवासी हैं, ने बताया कि उनका भाई 5 तारीख से अस्पताल में भर्ती है। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि उसका लिवर पूरी तरह खराब हो चुका है और दो दिन पहले ही इंदौर रेफर करने की बात कही गई थी।
गायत्री की आवाज में दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा,
“सुबह 11 बजे से कहा जा रहा है कि एंबुलेंस आ रही है। रात 1 बज गए, लेकिन कोई वाहन नहीं आया। हम दो महिलाएं यहां परेशान बैठे हैं। अगर समय पर इंदौर पहुंच जाते, तो इलाज शुरू हो जाता।”
यह बयान सिर्फ एक परिवार की व्यथा नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल भी है।
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एंबुलेंस सेवा और आपातकालीन तंत्र पर गंभीर प्रश्न
आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज को 14 घंटे तक इंतजार कराना स्वास्थ्य तंत्र की बड़ी कमी को उजागर करता है। आपातकालीन सेवाओं में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में देरी किसी भी मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


