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  • September 18, 2026
  • Last Update August 13, 2026 4:25 pm
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रिश्वतखोर बाबू पर लोकायुक्त का शिकंजा! 50 हजार लेते कलेक्टोरेट में रंगेहाथ गिरफ्तार, रिटायर्ड लकवाग्रस्त अधिकारी के भुगतान के लिए मांगे थे डेढ़ लाख

रिश्वतखोर बाबू पर लोकायुक्त का शिकंजा! 50 हजार लेते कलेक्टोरेट में रंगेहाथ गिरफ्तार, रिटायर्ड लकवाग्रस्त अधिकारी के भुगतान के लिए मांगे थे डेढ़ लाख

आगर मालवा- जिला कलेक्टर कार्यालय में शुक्रवार को लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के एक बाबू को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने विभाग के सेवानिवृत्त एवं लकवाग्रस्त अधिकारी के बीमा, ग्रेच्युटी, पेंशन तथा अन्य देयकों का भुगतान कराने के एवज में डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। जानकारी के अनुसार फरियादी विजय बोरसिया के पिता गोवर्धनलाल बोरसिया, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में अधिकारी के पद से वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त हुए थे। वर्तमान में वे लकवाग्रस्त हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी, बीमा, पेंशन एवं अन्य वित्तीय लाभों के भुगतान के लिए उनका पुत्र लंबे समय से विभाग के चक्कर काट रहा था।

आरोप है कि विभाग में पदस्थ बाबू मनीष पिता राधारमण पंड्या ने सभी लंबित भुगतान जारी कराने के बदले डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। परेशान होकर विजय बोरसिया ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस उज्जैन से की। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त ने ट्रैप की योजना बनाई। तय योजना के अनुसार शुक्रवार, 10 जुलाई को फरियादी आरोपी को रिश्वत की पहली किस्त देने पहुंचा। उसने 50 हजार रुपये नकद तथा 50 हजार रुपये का चेक दिया। आरोपी ने चेक वापस कर दिया और 50 हजार रुपये नकद अपने पास रख लिए। जैसे ही उसने रिश्वत की राशि स्वीकार की, फरियादी ने पूर्व निर्धारित संकेत लोकायुक्त टीम को दे दिया। संकेत मिलते ही लोकायुक्त निरीक्षक दीपक शेजवार के नेतृत्व में टीम ने मौके पर दबिश देकर बाबू मनीष पंड्या को 50 हजार रुपये की रिश्वत के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बताया गया है कि फरियादी के पिता गोवर्धनलाल बोरसिया लकवाग्रस्त होने के कारण स्वयं कार्यालय नहीं आ सकते थे, इसलिए उन्होंने अपने पुत्र विजय बोरसिया को भुगतान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए भेजा था। इसी दौरान आरोपी बाबू ने रिश्वत की मांग कर दी, जिसके बाद लोकायुक्त ने यह कार्रवाई की।

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