बरही: आदिवासी बहुल पहाड़ों के बीच बसे दौरवा-कुंडवा में एकादशी के अवसर पर ऐतिहासिक जतरा मेला धूमधाम से मनाया गया। मेला का शुभारंभ पाहन पूजा और वन देवी-देवताओं की आराधना से हुआ।आदिवासी समाज के श्रद्धालुओं ने परंपरागत वेशभूषा में रंगारंग नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रमुख मनोज रजक, जिप प्रतिनिधि गणेश यादव और स्थानीय मुखिया अनीता देवी ने कहा कि जतरा जैसे आयोजनों से आदिवासी संस्कृति जीवंत रहती है और समाज को एकजुट करने का अवसर मिलता है।आयोजन समिति ने अतिथियों का स्वागत मांदर की थाप, पारंपरिक टोपी, माला और तीर-धनुष देकर किया। आयोजकों के अनुसार दौरवा जतरा का इतिहास 1950 से शुरू होता है और यह आज भी आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए है।मेले में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। यहां दूर-दराज़ के जिलों से लोग शामिल हुए, आपसी मेल-मिलाप हुआ और कई परिवार वर-वधू की तलाश के उद्देश्य से भी पहुंचे।कार्यक्रम में राजेश उरांव (अध्यक्ष), रवि लिंडा (उपाध्यक्ष), पप्पू इक्का (सचिव), सामू लिंडा (उप सचिव), रंजीत उरांव (कोषाध्यक्ष), पवन इक्का (उप कोषाध्यक्ष), टिकेंद्र टोप्पो, सुखदेव राम, जगदीश उरांव, सोमर टोप्पो, अजन मिंज, मनीष इक्का, मनीष मिंज, मंगल उरांव, भजन उरांव, अंजलुस इक्का सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।



