बरही (प्रभात वाणी)। इस वर्ष छठ पूजा की तैयारियों के बीच महंगाई ने आम जनजीवन पर गहरा असर डाला है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर वस्तु के दामों में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिल रही है—फिर चाहे वह चावल हो, घी, नारियल या बांस से बनी पारंपरिक सामग्री। बावजूद इसके श्रद्धालु अपने उत्साह और आस्था में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दे रहे हैं।
घी, गोविंद भोग और बासमती सुपर चावल के दामों में जबरदस्त उछाल
खुले बाजार में पिछले साल 100 रुपए प्रति किलो मिलने वाला बासमती सुपर चावल अब 150 से 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं गोविंद भोग चावल भी 180 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। खाद्य पदार्थ विक्रेता अजय कुमार और श्री ओम स्टोर के संचालक के अनुसार, बंगाल में अत्यधिक बारिश के कारण इस बार बासमती सुपर और अन्य प्रजातियों की पैदावार में कमी आई है, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता घटी और कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया। घी की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
नारियल की कीमतें भी चढ़ीं आसमान पर
पूजा भंडार संचालक चमारी केशरी के अनुसार, नारियल की मांग बढ़ने से इसकी कीमत भी 25 रुपए से बढ़कर 40 रुपए प्रति पीस तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि नारियल पानी की बढ़ती खपत के चलते पकने वाले नारियल की कमी हो गई है, जिससे बाजार में इसकी कीमतें और बढ़ गई हैं।
गुड़, दाल और गेहूं की कीमतों में मिला-जुला असर : जहां गुड़ पिछले साल 50 रुपए प्रति किलो था, वहीं अब यह 60 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। चना दाल 80 से 90 रुपए प्रति किलो के बीच स्थिर है। गेहूं की कीमतें 30 से 40 रुपए प्रति किलो तक हैं, जबकि रिफाइंड तेल की कीमतें तो स्थिर हैं लेकिन वजन में कमी देखने को मिली है—एक लीटर के बजाय अब 750 ग्राम तक ही मिल रहा है।
बांस से बने पारंपरिक पूजन-सामग्रियों की कीमतों में बढ़ोतरी: हरला तुरिया टोला के बांस शिल्पकार रामविलास तुरी ने बताया कि बांस की मूल कीमत बढ़ने से पूजन सामग्री की दरें भी बढ़ानी पड़ी हैं। बांस के सूप का जोड़ा 400 से बढ़कर 500 रुपए, डालिया 50 से बढ़कर 100 रुपए, और टोकरी का जोड़ा 150 से बढ़कर 200 रुपए हो गया है।
श्रद्धा के आगे महंगाई भी हुई नतमस्तक
महंगाई की इस मार के बावजूद श्रद्धालुओं की भावना अडिग बनी हुई है। व्रती महिलाओं का कहना है कि चाहे कीमतें कितनी भी बढ़ जाएं, छठ माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति में कोई कमी नहीं आने वाली। जीएसटी दरों और उत्पादन लागत में वृद्धि ने जरूर बाजार पर असर डाला है, लेकिन भक्ति के आगे हर मुश्किल नतमस्तक है।



